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Praggnanandhaa: हार कर भी बने बाजीगर, भारत को गर्व है 18 साल के अपने शतरंज के बादशाह पर

नई दिल्ली। 23 और 24 अगस्त को हुए शतरंज विश्वकप फाइनल के मुकाबले में भले ही विश्व चैम्पियन मैग्नस कार्लसन ने बाजी मारी हो, लेकिन भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर आर. प्रागनानंदा ने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया। शतरंज विश्वकप फाइनल के उपविजेता रहे प्रागनानंदा पर आज पूरे भारत को गर्व है। 18 वर्षीय ग्रैंड मास्टर आर प्रागनानंदा ने विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को मैच के दौरान कड़ी चुनौती दी और उन्हें ड्रॉ खेलने पर मजबूर कर दिया। शुरुआती दोनों बाजी ड्रॉ रही और अंत में कार्लसन ने टाईब्रेकर में जीत दर्ज की।

अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) ने ट्वीट कर बताया कि “प्रागनानंदा 2023 FIDE विश्व कप के उपविजेता हैं। प्रभावशाली टूर्नामेंट के लिए 18 वर्षीय भारतीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बधाई। फाइनल में पहुंचने के रास्ते में प्रगनानंद ने विश्व के नंबर दो खिलाड़ी हिकारू नाकामुरा और नंबर 3 खिलाड़ी फैबियानो कारूआना को हराया। सिल्वर मेडल जीतकर प्रागनानंदा ने FIDE उम्मीदवारी के लिए टिकट भी हासिल कर लिया है।”

बता दें चेन्नई के रहने वाले ग्रैंडमास्टर प्रागनानंद, मैग्नस कार्लसन से करीब 14 साल छोटे हैं। जानकारी के मुताबिक मैग्नस कार्लसन अप्रैल 2004 में ग्रैंडमास्टर बने और इसके 16 महीने बाद अगस्त 2005 में आर प्रज्ञानानंद का जन्म हुआ। मैग्नस कार्लसन 32 वर्ष के हैं जबकि आर प्रज्ञानानंद की उम्र अभी सिर्फ 18 साल है।

फाइनल के विजेता को लगभग 90,93,551 ($110k) रुपये मिलेंगे, जबकि उपविजेता को लगभग 66,13,444 ($80) रुपये मिलेंगे. टूर्नामेंट का कुल पुरस्कार पूल लगभग 1,51,392,240 रुपये है.