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भारत ने रचा इतिहास, चांद के साउथ पोल पर पहुंचा चंद्रयान-3

नई दिल्ली। चंद्रयान-3 आज चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतर चुका है। इसी के साथ भारत ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-3 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत पहला देश बन गया है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग के बाद अब प्रज्ञान रोवर उसमें से निकलेगा और चंद्रमा की सतह पर घूमकर रिसर्च कर जानकारी जुटाएगा।

जल्द ही बाहर आएगा प्रज्ञान
इसरो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-3 के लिए मुख्य रूप से तीन उद्देश्य निर्धारित हैं। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराना, चंद्रमा की सतह रेजोलिथ पर लैंडर को उतारना व घुमाना और रोवर्स से चंद्रमा की सतह पर शोध कराना।

चांद पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-3 की लैंडिंग ​होने के बाद इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने प्रेस वार्ता कर अभियान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी। उन्होंने बताया कि “प्रज्ञान रोवर जल्द ही बाहर आएगा और इसमें एक दिन भी लग सकता है। इसमें से कई यंत्र भी निकलेंगे जिनमें रम्भा शामिल है। रम्भा चंद्रमा के वातावरण का अध्ययन करेगा।

इसरो की सबसे मुश्किल घड़ी
ये रोवर सबसे पहले लेज़र से उस ज़मीन का अध्ययन करेगा और साथ ही उसके रसायन को भी जानने की कोशिश करेगा। एस. सोमनाथ ने बताया कि इस अभियान की सबसे मुश्किल घड़ी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाकर छोड़ना था और फिर इसको चंद्रमा पर लैंड कराना था।

इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन के ग्राउंड स्टेशंस को भी शुक्रिया अदा किया। सोमनाथ ने कहा कि कई विदेशी एजेंसियों ने भी इसमें मदद की जिस कारण से आज हमें इतनी बड़ी सफलता मिल पाई है।

पीएम मोदी ने दी बधाई
चंद्रयान की सफल लैंडिंग पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बधाई दी। ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ़्रीका गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा, “जब हम अपनी आंखों के सामने ऐसा इतिहास बनते हुए देखते हैं तो जीवन धन्य हो जाता है। ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्र जीवन की चेतना बन जाती हैं। ये पल अविस्मरणीय है।”

“ये क्षण अभूतपूर्व है। ये क्षण विकसित भारत के शखनांद का है. ये क्षण नए भारत के जयघोष का है। ये क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। ये क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का है। ये क्षण 140 करोड़ धड़कनों के सामर्थ्य का है। ये क्षण भारत में नई ऊर्जा नई चेतना का है। “