नई दिल्ली। मुंबई में I.N.D.I.A गठबंधन की बैठक से ठीक पहले आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को विपक्षी गठबंधन के प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में पेश करने की इच्छा जताई है। यह इच्छा AAP की महत्वकांक्षा कम और I.N.D.I.A गठबंधन से बाहर निकलने का रास्ता ज्यादा लग रही है।
मॉनसून सेशन के दौरान संसद में आम आदमी पार्टी दिल्ली बिल से ग्राउंड टेस्टिंग कर चुकी है। पार्टी से जुड़े कई नेताओं का मानना है कि I.N.D.I.A के साथ जाने में पार्टी को फायदा कम नुकसान ज्यादा है। AAP नहीं चाहती कि वो 2024 का लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की सहयोगी दिखाई दे क्योंकि पार्टी 2024 के आम चुनाव में सीधे भारतीय जनता पार्टी के साथ मुकाबला करना चाहती है।
अभी तक की AAP की राजनीति और अरविंद केजरीवाल का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निरंतर सीधा हमला किया जाना, दिखलाता है कि आम आदमी पार्टी अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस का विकल्प बनना चाहती है। अब ये सपना I.N.D.I.A गठबंधन में रह कर तो पूरा हो नहीं सकता। इसलिए ‘पैंतरों’ का सहारा लिया जा रहा है।
कांग्रेस ने संसद में AAP का साथ दिया था, ऐसे में अरविंद केजरीवाल सीधे ये नहीं कह सकते कि वह अब गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना चाहते। इसलिए केजरीवाल कभी छत्तीसगढ़ तो कभी मध्य प्रदेश में गारंटी बांटते नजर आ रहे हैं। इस सब के बीच अरविंद केजरीवाल के नाम प्रधानमंत्री पद के दावेदार की सुर्री सीधे तौर पर इशारा है कि आम आदमी पार्टी अब और गठबंधन का हिस्सा नहीं रहना चाहती। कुल जमा केजरीवाल I.N.D.I.A से बाहर जाना चाहते हैं और आने वाले कुछ दिनों में ऐसा होता नजर आए तो चकित नहीं होइएगा।

