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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पीएम मोदी के साथ नहीं गए राजघाट, जानिए क्या थी वजह?

नई दिल्ली। G20 शिखर सम्मेलन में भारत आए कई नेता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को राजघाट पहुंचे। इन नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना, ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन शामिल थे।

हालांकि, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान शामिल राजघाट नहीं गए जबकि वह सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को ही दिल्ली पहुंच चुके थे। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के राजघाट न जाने के पीछे कई जानकारों का कहना है कि ऐसा करने के पीछे उनके मन में महात्मा गांधी के प्रति किसी तरह का अनादर नहीं बल्कि उनकी ‘सलफ़ी’ विचारधारा हो सकती है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के ज़ाकिर हुसैन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इस्लामिक स्टडीज़ के पूर्व निदेशक प्रोफ़ेसर अख़्तरुल वासे कहते हैं, “सलफ़ी या जिन्हें अहले हदीस कहते हैं वो किसी तरह की समाधि या मज़ार पर नहीं जाते हैं।”

इस्लामिक स्कॉलर ज़फ़रुल इस्लाम ख़ान बताते हैं कि उनके (सलफ़ी विचारधारा को मानने वाले) यहां तो “क़ब्र को पक्का बनाना तक ग़लत” है। इस्लामी न्यायशास्त्र यानी फ़िक़्ह (ज्यूरिशप्रूडेंस) के पांच प्रमुख सिद्धांत हैं: हनफ़ी, शफ़ई, मालिकी, हम्बली और जाफ़री।

जाफ़री या फ़िक़्ह जाफ़िरी शिया समुदाय से संबंधित है। बाक़ी चारों सुन्नी समुदाय से जुड़े हैं। भारत में अधिकतर मुसलमान हनफ़ी सिद्धांत को मानते हैं।