नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि जरूरत पड़ी तो लोकसभा में अपने निलंबन के खिलाफ वह उच्चतम न्यायालय तक जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में हम सोच रहे हैं। बता दें गुरुवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणियों पर उन्हें सदन से निलंबित कर दिया गया था तथा उनके खिलाफ इस मामले की जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया गया।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मुझे जब भी संसद की विशेषाधिकार समिति के पास बुलाया जाएगा, तो मैं जरूर जाऊंगा। हम लोग सभी नियमों और परंपराओं को मानकर चलते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले फांसी दे दी गई और फिर मुकदमे का सामना करना है। अजीबो गरीब स्थिति है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मैंने सदन में जो बात कही उसमें मुझे गलती नहीं लगती। हो सकता है कि यह सरकार आगे भगवा शब्दकोश बना दे और तय करे कि विपक्ष के लोग कौन-कौन से शब्द का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पूछना चाहता हूं कि ‘नीरव’ का मतलब क्या होता है। मैंने किसी को आहत करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था। क्या अपने मन की बात करना गलत है, नाजायज है?”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब के दौरान विपक्ष के वॉक आउट पर चौधरी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने जब दो घंटे तक मणिपुर का उल्लेख नहीं किया तो विपक्ष को सदन से बहिर्गमन करना पड़ा। चौधरी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ तीन मिनट तक मणिपुर को लेकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस सत्र में नियमों और संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ाईं और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा किए जाने के बाद भी कई विधेयक पारित करवा लिए गए।

