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नई सदन में पेश हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ , महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में मिलेगा 33% आरक्षण

नई दिल्ली। आज लोकसभा में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पेश किया। इस अधिनियम में देश की महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण का प्रस्ताव है। नई ससंद की कार्यवाही के पहले ही दिन ही केंद्र सरकार ने ये बिल पेश किया। केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को ही इस बिल को मंजूरी दे दी थी। बिल के प्रावधान के मुताबिक लोकसभा या विधानसभाओं मौजूदा एससी-एसटी आरक्षण में भी 33% हिस्सेदार महिलाओं की होगी। वर्तमान में संसद में 82 महिला सांसद हैं।

27 साल से लं​बित है ये बिल
आज से 27 साल पहले इस बिल को 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने इस बिल को पेश किया था, लेकिन विरोध के कारण तब ये पास नहीं हो सका था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 1998 में लोकसभा में फिर महिला आरक्षण बिल को पेश किया था। कई दलों के सहयोग से चल रही वाजपेयी सरकार को इसको लेकर विरोध का सामना करना पड़ा। इस वजह से बिल पारित नहीं हो सका। वाजपेयी सरकार ने इसे 1999, 2002 और 2003-2004 में भी पारित कराने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई।

सत्ता मोह में कांग्रेस ने बिल को लोकसभा में नहीं किया पेश
2008 में यूपीए सरकार ने इस बिल को राज्यसभा में पेश किया। 9 मार्च 2010 को भारी मत के साथ बिल को राज्यसभा में पारित किया गया। लेकिन यूपीए सरकार ​के घटक दल समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने बिल का पुरजोर विरोध किया। जिस कारण से कांग्रेस ने बिल को लोकसभा में पेश ही नहीं किया। कांग्रेस को डर था कि अगर बिल को लोकसभा में पेश किया गया तो सरकार संकट में आ सकती है।

2014 में बिल भंग हो गया
साल 2014 में लोकसभा भंग होने के बाद यह बिल अपने आप ख़त्म हो गया। लेकिन राज्यसभा स्थायी सदन है, इसलिए यह बिल अभी जिंदा है। इसलिए भाजपा ने बिल को नए सिरे पेश किया।

बिल का पेश होना एक सपने के पूरा होने जैसा है
प्रधानमंत्री मोदी ने बिल पेश करने को एक सपने के पूरा होने जैसा बताया है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के विकास के लिए सिर्फ़ बातें बनाना ही काफ़ी नहीं है। महिला आरक्षण का मुद्दा वर्ष 2014 और वर्ष 2019 में बीजेपी के संकल्प पत्र के वादों में शामिल रहा है। कांग्रेस पार्टी ने इस बिल के समर्थन की बात कही है। इस बिल को कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होगी।