नई दिल्ली। देश में एक ऐसा पुलिस स्टेशन है, जहां थानेदार की कुर्सी पर आज तक किसी अधिकारी ने बैठने की हिम्मत नहीं की। जी हां, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विश्वेश्वरगंज स्थित कोतवाली पुलिस स्टेशन में थानेदार की कुर्सी पर बाबा काल भैरव विराजते हैं, इस कारण बाबा काल भैरव को कोतवाल भी कहा जाता है। अगर यहां किसी थानेदार की तैनाती होती है तो वह बगल में कुर्सी लगाकर बैठता है।
ये परंपरा बहुत पुरानी है लेकिन इस परंपरा कब और किसने शुरू किया ये किसी को नहीं पता। यहां बाबा की इतनी मान्यता है कि पुलिस भी बाबा की पूजा करने से पहले कोई काम नहीं शुरू करती। मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने पूरी काशी नगरी का लेखा-जोखा बाबा काल भैरव को सौंप रखा है। बाबा की अनुमति के बिना यहां कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता और अगर ऐसा होता है तो उसे सजा भी बाबा काल भैरव ही देते हैं।
माना जाता है कि साल 1715 में बाजीराव पेशवा ने यहां बाबा काल भैरव का मंदिर बनवाया था। यहां जब भी कोई नया अधिकारी आता है तो वो सबसे पहले बाबा के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेता है।
बता दें कि काल भैरव मंदिर में हर दिन 4 बार आरती होती है। आरती से पहले बाबा को स्नान कराकर उनका श्रृंगार किया जाता है। खास बात यह है कि आरती के समय पुजारी के अलावा मंदिर के अंदर किसी को जाने की अनुमति नहीं होती। बाबा को सरसों का तेल चढ़ता है। साथ ही एक अखंड ज्योति बाबा के पास हमेशा जलती रहती है।

