नई दिल्ली। 12 नवंबर को जहां एक ओर पूरा देश दिवाली की खुशियां मनाने की तैयारी कर रहा था, तो वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सुबह 4 बजे निर्माणाधीन टनल का 50 मीटर हिस्सा धंस गया। जिसमें करीब 40 मजदूर फंस गए। जिन्हें बचाने के लिए 24 घंटे से राहत और बचाव कार्य चल रहा है। जिसमें कम से कम दो से तीन दिनों का समय लग सकता है। राहत की बात यह है कि अभी तक सभी मजदूर सुरक्षित हैं। टनल में आठ राज्यों के 40 मजदूर टनल में फंसे हैं।
झारखंड: 15
यूपी: 8
ओडिशा: 5
बिहार: 4
पश्चिम बंगाल: 3
असम: 2
उत्तराखंड: 2
हिमाचल प्रदेश: 1
ताजा खबर के अनुसार करीब 27 घंटे बाद फंसे मजदूरों से वॉकी टॉकी के जरिये संपर्क हो पाया। सभी मजदूर सुरक्षित हैं। उन्हें पाइप के जरिए ऑक्सीजन और खाना-पानी पहुंचाया जा रहा है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हालात पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी से फोन पर जानकारी ली।
कब हुआ हादसा?
समाचार पत्रों के अनुसार, हादसा रविवार सुबह शिफ्ट चेंजिंग की दौरान हुआ। रात की शिफ्ट वाले श्रमिक टनल से बाहर आ रहे थे और अगली शिफ्ट वाले अंदर जा रहे थे। टनल के मुख्य द्वार से करीब 300 मीटर दूरी पर ऊपरी हिस्से से मलबा आने से टनल बंद हो गई।
यहां से करीब 2700 मीटर भीतर 40 से 50 मजदूर काम कर रहे थे। कार्यस्थल तक ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए डाली गई लाइन भी मलबे से ध्वस्त हो गई है। हालांकि परियोजना के अधिकारी भीतर पर्याप्त मात्रा में पानी और ऑक्सीजन उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं। फंसे मजदूरों को बाहर निकालने का एकमात्र विकल्प टनल से मलबा हटाना ही है। वर्टिकल ड्रिलिंग मशीन की मदद से मलबे को निकाला जा रहा है।

