नई दिल्ली। 23 अगस्त 2023, एक ऐसा दिन बन गया है जो सदियों तक याद रहेगा। आज ही दिन भारत ने चांद पर चंद्रयान 3 की सफलतम लैंडिंग कर इतिहास रचा। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी देश ने चांद के दक्षिण ध्रुव पर सफलतापूर्वक अपना चंद्रयान उतारा हो। इसी के साथ इसरो के वैज्ञानिकों के साथ पूरा देश जश्न में डूब गया। चारों ओर तालियों की गड़गड़ाहट थी और मुस्कराते हुए चेहरे थे।
इस सबके बीच एक चेहरा याद आया, 4 साल पहले 2019 में, जब चंद्रयान 2 ने चांद से महज चंद कदम पहले अपना लैंडर खो दिया था। पीएम मोदी ने मिशन कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया। सुबह प्रधानमंत्री फिर इसरो कंट्रोल रूम पहुंचे और फिर वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया। के. सिवन पीएम मोदी को छोड़ने उनके कार तक पहुंचे और अचानक फूट-फूटकर रोने लगे। तब पीएम ने उन्हें गले लगा लिया और हौसला बढ़ाया।
इस बार जब चंद्रयान 3 ने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की तो के. सिवन की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने कहा कि आख़िरकार हमारी प्रार्थनाएं सच हुईं। लैंडिंग के बाद हम वापस नहीं आए, रोवर लैंडर से बाहर आने तक मैं कंट्रोल रूम में ही बैठा रहा। रोवर लैंडर से बाहर आया और चंद्रमा की सतह पर चला गया, इसे देखने के बाद ही मैं देर रात अपने घर वापस आया। “हम वास्तव में उत्साहित हैं…हम लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे। मैं बहुत खुश हूं। पूरे देश को इस पल का इंतजार था।
चंद्रयान 3 की सफलता के बाद आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वह शब्द याद आते हैं जो उन्होंने 2019 में उस समय तत्कालीन इसरो चीफ के. सिवन को ढांढस बधाते हुए कहे थे। उन्होंने कहा था कि उनके पुरुषार्थ से देश फिर खुशी मनाने लगेगा।
4 साल बाद खुशी का वही मौका है जब भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारने वाला पहला देश बनने का गौरव हासिल किया है। के. सिवन के वो आंसू चांद जीतने की जिद बन गए और आज इसरो के वैज्ञानिकों ने चांद को मुट्ठी में कर ही लिया।

