ट्रें​डिंगदेशराजनीति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना को दी मंजूरी, 30 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ऐलान किया था कि हम इस विश्‍वकर्मा जयन्‍ती पर करीब 13-15 हजार करोड़ रुपये के परिव्‍यय से पीएम विश्‍वकर्मा योजना की शुरूआत करेंगे। बुधवार यानी 16 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 हजार करोड़ रुपये के वित्‍तीय परिव्‍यय से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समर्थन देने के लिए ​प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का लक्ष्य करीब 30 लाख परिवारों को सहायता प्रदान करना है।

इस योजना का उद्देश्‍य हाथों और औजारों के माध्यम से काम करने वाले शिल्‍पकारों और कारीगरों की पीढियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल को मजबूती तथा बढावा देना है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने पांच वर्ष की अवधि के लिए पीएम विश्‍वकर्मा योजना को आज स्‍वीकृति दी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नई दिल्‍ली में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत शुरूआत में 18 पारंपरिक उद्योग-धंधों को शामिल किया जाएगा। इनमें बढ़ई, नाव बनाने वाले, सुनार, राजमिस्री, खिलौने बनाने वाले, लौहार और कुम्‍हार शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि योजना के अंतर्गत इनके हुनर को बढ़ाया जाएगा तथा उपकरण प्रोत्‍साहन, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्‍साहन और बाजार उपलब्‍ध कराया जाएगा।

वैष्णव ने बताया कि इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि इन वर्गों का किस तरह से अधिक कौशल विकास हो तथा नए प्रकार के उपकरणों एवं डिजाइन की जानकारी मिले। इस योजना के तहत उपकरणों की खरीद में भी मदद की जाएगी। इसके तहत दो प्रकार का कौशल विकास कार्यक्रम होगा जिसमें पहला ‘बेसिक’ और दूसरा ‘एडवांस’ होगा। इस कोर्स को करने वालों को मानदेय (स्टाइपंड) भी मिलेगा।

योजना के अंतर्गत पांच प्रतिशत की रियायती ब्‍याज दर पर एक लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। पीएम विश्‍वकर्मा योजना के अंतर्गत शिल्‍पकारों और कारीगरों को पीएम विश्‍वकर्मा प्रमाण-पत्र और पहचान पत्र के जरिए मान्‍यता दी जाएगी।

हालांकि योजना में राज्य सरकारों की भी भूमिका होगी, लेकिन सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। यह योजना कारीगरों, श्रमिकों और शिल्पकारों के जीवन में नई सुबह लाने वाली है। ओबीसी समुदाय से ज्यादातर शिल्पकार और कारीगर इस योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से लाभान्वित होंगे और उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।