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अंग्रेजों के जमाने के 3 कानून बदलेगी मोदी सरकार, लोकसभा में अमित शाह ने पेश किए नए विधेयक

नई दिल्ली। केंद्र सरकार अंग्रेजों के जमाने के कुछ कानूनों में संशोधन करना चाहती है। इसके लिए केंद्र सरकार दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक-2023 लेकर आएगी। केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने शुक्रवार यानी 11 अगस्त 2023 को लोकसभा में भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) को खत्म करने और उनकी जगह नए कानून लाने का प्रस्ताव पेश किया।

विधेयकों को पेश करने के साथ ही अमित शाह ने कहा कि इन्हें संसद की स्थायी समिति में विचार के लिए भेजा जाएगा। इससे देश के आपराधिक कानूनों में बहुत बड़े बदलाव होने के आसार हैं। विधेयकों में विवादास्पद राजद्रोह कानून को समाप्त करने का प्रावधान है। साथ ही मॉब लिंचिंग के मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान भी होगा।

सदन में गृहमंत्री ने कहा, ‘गत 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुलामी की मानसिकता को समाप्त करने का संकल्प लिया था और तभी से इस दिशा में काम करना हमने शुरू कर दिया था। हम आईपीसी (1857), सीआरपीसी (1858), इंडियन एविडेंस ऐक्ट (1872) को खत्म करेंगे, जो कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए थे। इसकी जगह पर हम तीन नए कानून लाएंगे ताकि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसका लक्ष्य सजा नहीं, न्याय देना है।’

गृहमंत्री ने लोकसभा को बताया कि भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह अब भारतीय न्याय संहिता-2023, Criminal Procedure Code 1898 की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और Indian Evidence Act 1872 की जगह अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम होगा। जानकारी के मुताबिक विवादास्पद राजद्रोह कानून (आईपीसी की धारा 124ए) को खत्म कर दिया गया है और देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए एक धारा (धारा 150) लाई जाएगी।

केंद्र सरकार ने 2020 के मार्च में एक क्रिमिनल लॉ रिफॉर्म्स कमेटी बनाई थी। इसे आईपीसी, सीआरपीसी और इंडियन एविडेंस ऐक्ट 1872 में सुधार के लिए सुझाव देने थे। इस समिति की अध्यक्षता तब के दिल्ली स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर रनबीर सिंह को दी गई थी। इसके अलावा समिति में एनएलयू-डी के तब के रजिस्ट्रार प्रोफेसर डॉक्टर जीएस बाजपेयी, डीएनएलयू के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉक्टर बलराज चौहान, वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और दिल्ली के पूर्व जिला और सत्र न्यायधीश जीपी थरेजा भी शामिल थे।

2022 के फरवरी में जनता से सुझाव लेने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। 2022 के अप्रैल में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा को जानकारी दी थी कि केंद्र सरकार ने आपराधिक कानूनों की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है।