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संसद में पीएम मोदी ने किया पंडित नेहरू का जिक्र, जिसकी खूब रही चर्चा

नई दिल्ली। आज से संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विशेष सत्र को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में 75 वर्षों के दौरान सदन में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों और यादगार पलों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के उस भाषण का जिक्र किया जो उन्होंने आजादी के बाद संसद में दिया था। उन्होंने कहा कि नेहरू जी का इसी सदन में दिया गया ‘एट द स्ट्रोक ऑफ मिडनाइट’ भाषण हम सबको प्रेरित करता रहेगा। इसके अलावा उन्होंने सांसद के रूप में अपने पहले दिन को याद किया।

पीएम मोदी ने आज के अपने संबोधन में संसद भवन के निर्माण को लेकर कहा, ‘ये सही है कि इस इमारत के निर्माण का निर्णय विदेशी शासकों का था, लेकिन इस भवन के निर्माण में परिश्रम, पसीना और पैसा मेरे देशवासियों के लगा था।’

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने चंद्रयान 3 की सफलता और G20 के सफल आयोजन की भी तारीफ की। उन्होंने कहा G20 की सफलता किसी व्यक्ति या दल की नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ भारतीयों की सफलता है। भारत इस बात के लिए गर्व करेगा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकन यूनियन G20 का स्थाई सदस्य बना।

इसके अलावा पीएम मोदी ने संबोधन के दौरान पंडित नेहरू को याद करते हुए कहा, “नेहरूजी का इसी सदन में दिया गया ‘एट द स्ट्रोक ऑफ मिडनाइट’ भाषण हम सबको प्रेरित करता रहेगा। इसी सदन में अटल जी ने कहा था कि सरकारें आएंगी और जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश रहना चाहिए।”

पंडित नेहरू की प्रारंभिक मंत्रिपरिषद का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘पंडित नेहरू की प्रारंभिक परिषद थी, तब बाबा साहेब आंबेडकर दुनिया के श्रेष्ठ तौर-तरीकों को यहां लाने के आग्रही थे। इसका देश को लाभ मिला। बाबा साहेब हमेशा कहते थे कि सामाजिक न्याय के लिए औद्योगिकीकरण होना जरूरी है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी नेहरूजी की सरकार में पहले वाणिज्य और उद्योग मंत्री थे। वे पहली औद्योगिक नीति लेकर आए। उनका अहम योगदान रहा था।’

पीएम मोदी ने शास्त्री जी के बारे में कहा, ‘लाल बहादुर शास्त्री जी ने 1965 के युद्ध में देश के जवानों का हौसला इसी सदन से बुलंद किया था। यहीं उन्होंने हरित क्रांति की मजबूत नींव रखी थी।’

इंदिरा गांधी जी के निर्णयों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘बांग्लादेश की मुक्ति का आंदोलन और उसका समर्थन भी इसी सदन ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व में किया था। इसी सदन ने इमरजेंसी में लोकतंत्र पर होता हुआ हमला भी देखा था। भारत के लोगों की ताकत का अहसास कराते हुए मजबूत लोकतंत्र की वापसी भी इसी सदन ने देखी।’

इसी के साथ पीएम मोदी ने उस पल को भी याद किया जब सदन ने कार्यकाल के दौरान तीन प्रधानमंत्रियों को खो दिया था। पीएम मोदी ने कहा, ‘उमंग और उत्साह के पलों के बीच सदन की आंख से आंसू भी बहे, ये सदन दर्द से भर गया, जब देश ने अपने 3 प्रधानमंत्रियों (नेहरू जी, शास्त्री जी और इंदिरा जी) को कार्यकाल के दौरान खोया।’