चुनावराजनीति

मानसून सत्र में हंगामा, 2 बार लाठीचार्ज… फिर भी नीतीश कुमार चुप क्यों? जानिए क्या है मायने

नई दिल्ली। बिहार में 5 दिन चले मानसून सत्र के दौरान, विधानसभा के बाहर दो बार लाठीचार्ज हुआ लेकिन दोनों ही मौकों पर नीतीश कुमार लगभग चुप ही रहे और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को आगे कर दिया। दरअसल 17 और 18 जुलाई को भाजपा विरोधी दलों की कर्नाटक में बड़ी बैठक होनी है। भतीजे द्वारा किनारे लगा दिए गए शरद पवार के बाद, नीतीश कुमार को लगता है कि अब प्रधानमंत्री के लिए सबसे मजबूत नाम वही हैं और एंटी-बीजेपी महागठबंधन की वो ही सबसे मजबूत कड़ी होंगे। यही कारण है कि वो मौन हैं और शांति से कर्नाटक की बैठक का इंतजार कर रहे हैं।

2024 के आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस लगातार विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है। पिछले महीने बिहार के पटना में मेगा विपक्षी बैठक हुई और अब कर्नाटक के बेंगलुरु में कांग्रेस ने दूसरी विपक्षी एकता बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में करीब 24 राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। इस बैठक में केडीएमके और एमडीएमके भी हिस्सा लेंगे। जो 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के सहयोगी थे, लेकिन अब विपक्षी दलों का हिस्सा हैं।

इस बैठक के लिए इन सभी दलों को साथ लाने का सारा श्रेय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को दिया जा रहा है। खड़गे ने शीर्ष विपक्षी दल के नेताओं को संबोधित करते हुए एक पत्र में उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई बैठक में उनकी भागीदारी के बारे में याद दिलाया कि हम जुलाई में फिर से मिलने पर सहमत हुए थे।

खड़गे ने अपने निमंत्रण पत्र में लिखा कि पटना की बैठक एक बड़ी सफलता थी क्योंकि हम हमारी लोकतांत्रिक राजनीति को खतरे में डालने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने में सक्षम थे और अगला आम चुनाव एकजुट होकर लड़ने पर सर्वसम्मति से सहमत हुए।