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एक जिद और उधार के ₹10,000 से करोड़पति बने नारायण मूर्ति

नई दिल्ली। आंखों में सपना, एक जिद और उधार के 10,000 रुपये ने एन आर नारायण मूर्ति को विश्व के बड़े उद्योगपतियों में शामिल कर दिया और उनकी कंपनी इंफोसिस दुनियाभर में कारोबार कर रही है और लाखों लोगों को रोजगार दे रही है। तो आइए जानते हैं फर्श से अर्श पर पहुंचने वाले इंफोसिस को-फाउंडर के सफर के बारे में…

इंफोसिस के को-फाउंडर एन. आर. नारायणमूर्ति का जन्म 20 अगस्त, 1946 को कर्नाटक के सिद्लाघत्ता में हुआ था। मिडिल क्लास फैमिली में जन्मे नारायण मूर्ति 8 भाई-बहनों में 5वें नंबर पर थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1967 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, मैसूर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद 1969 में आईआईटी कानपुर से एमटेक किया। 1970 में उन्होंने पुणे के पाटनी कंप्यूटर्स में बतौर असिस्टेंट मैनेजर नौकरी शुरू की।

एन आर नारायण मूर्ति की शादी सुधा मूर्ति के साथ 10 फरवरी, 1978 को बेंगलुरु में हुई। शादी के बाद से ही नारायण मूर्ति की जिंदगी में बड़ा बदलाव आना शुरू हो गया। उन्होंने अपनी कंपनी शुरू करने की जिद पकड़ ली। सबसे पहले उन्होंने सॉफ्टरोनिक्स नाम से कंपनी शुरू की, लेकिन वो असफल साबित हुई। इसके बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे।

नारायण मूर्ति ने 1981 में अपने छह साथियों के साथ कंपनी शुरू करने का प्लान बनाया। उस दौर में नारायण मूर्ति अपनी पत्नी सुधा के साथ एक कमरे के मकान में रहते थे। कंपनी का नाम इंफोसिस तय हुआ और इसकी स्थापना में नारायण मूर्ति ने अपना हिस्सा देने के लिए पत्नी से 10,000 रुपये उधार लिए थे। इस तरह पुणे के एक अपार्टमेंट से कंपनी की शुरुआत हुई। साल 1983 में कंपनी का मुख्यालय पुणे से बेंगलुरु ट्रांसफर कर दिया गया। नारायण मूर्ति कई कार्यक्रमों में पत्नी से उधार पैसे लेने की बात का गर्व के साथ जिक्र करते हैं।

इंफोसिस का बिजनेस अमेरिका, इंग्लैंड सहित दुनिया के कई देशों में है। 1981 से लेकर 2002 तक नारायण मूर्ति कंपनी के सीईओ रहे और उनके नेतृत्व में यह दुनिया की बड़ी कंपनियों के बराबरी में पहुंच गई। 1991 में इंफोसिस पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदली और 1999 में इसके शेयर अमेरिकी स्टॉक मार्केट NASDAQ में लिस्ट हुए। फिलहाल, इंफोसिस मार्केट कैप के हिसाब से देश की टॉप-10 कंपनियों में शामिल है। इसका मार्केट कैप 6,70,920.64 करोड़ रुपये है।

फोर्ब्स की रियल टाइम लिस्ट के अनुसार, भारतीय उद्योगपति और इंफोसिस के को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति की कुल नेट वर्थ 3.8 अरब डॉलर है। आज इंफोसिस एक शीर्ष सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो व्यापार परामर्श, सूचना प्रद्योगिकी और आउटसोर्सिंग सर्विसेज उपलब्ध कराती है। नारायण मूर्ति हमेशा कहते हैं कि आपने किस संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप अपने कठिन परिश्रम से अपने पूरे जीवन को बदल सकते हैं।

इंफोसिस को-फाउंडर की फैमिली की बात करें तो, पत्नी सुधा मूर्ति के अलावा उनका एक बेटा रोहन मूर्ति और बेटी अक्षता मूर्ति हैं। अक्षता की शादी ब्रिटेन में पीएम पद के प्रबल कैंडिडेट और यूके के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक से हुई है। उनकी बेटी अक्षता संपत्ति के मामले में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से भी अमीर हैं। दामाद ऋषि सुनक भी नारायण मूर्ति के संघर्ष पर गर्व करते हैं। उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि मेरे ससुर के पास कुछ भी नहीं था। उनकी आंखों में सिर्फ एक सपना था और मेरी सास के दिए कुछ पैसे, जिनसे उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक खड़ी कर दी. इंग्लैंड में भी इस कंपनी के हजारों कर्मचारी हैं। सुनक ने कहा था कि यह एक ऐसी कहानी है, जिस पर मुझे वास्तव में गर्व है।

नारायणमूर्ति को कारोबार जगत में मिले अन्य अवॉर्ड्स के अलावा उन्हें भारत सरकार ने 2000 में ‘पदमश्री’ से सम्मानित किया, इसके बाद साल 2008 में भारत सरकार द्वारा उन्हें ‘पद्म विभूषण’ अवार्ड से नवाजा गया। यही नहीं साल 2008 में ही फ्रांस सरकार ने भी उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया था।