चुनावराजनीति

‘सत्ता एक हाथ में थी, मंत्रियों को अधिकार नहीं दिए गए’, कांग्रेस नेता ने बताया छत्तीसगढ़ में क्यों हारी कांग्रेस

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अब पार्टी के नेता भूपेश बघेल पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। शुक्रवार को राज्य सरकार में मंत्री रहे जय सिंह अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि सत्ता केंद्रीकृत हो गई थी और मंत्रियों को पांच साल के शासनकाल के दौरान अधिकार नहीं दिए गए। साथ की उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के जनादेश का आदर नहीं कर पाई जिस कारण से इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। अग्रवाल, बघेल के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के उन नौ मंत्रियों में शामिल हैं जिन्हें हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है।

अग्रवाल ने कहा “2018 में, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष (भूपेश) बघेल साहब, तत्कालीन विपक्ष के नेता (टीएस) सिंहदेव जी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार चुनाव केंद्रीकृत हो गया था।” उन्होंने कहा, “शासन प्रशासन भ्रष्टाचार कर रहा था और भूपेश बघेल तानाशाही से सरकार चला रहे थे। मंत्रियों को जो अधिकार मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। पूरे पांच साल तक सत्ता केंद्रीकृत रही और कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में रही और खींचतान का माहौल कायम रहा। पिछले चुनाव में जनता ने जो जनादेश दिया कांग्रेस उसका आदर नहीं कर पाई।”

किसानों पर पार्टी के फोकस पर सवाल उठाते हुए अग्रवाल ने कहा कि कोरबा समेत शहरी सीटों पर पार्टी पिछड़ गई, क्योंकि सरकार ने किसानों पर ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि हमारे मुखिया को विश्वास था कि हम ग्रामीण इलाकों में सभी सीटें जीतेंगे और शहरी सीटों की ज्यादा जरूरत नहीं होगी।” कोरबा विधानसभा सीट से विधायक रहे अग्रवाल ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने विकास कार्यों को बाधित किया और कोरबा जिले में अपराध को पनपने दिया।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। इस चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की है। वहीं राज्य में 2018 में 68 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 35 सीटों पर सिमट गई। राज्य में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) एक सीट जीतने में कामयाब रही।