नई दिल्ली। 100 साल की उम्र में अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री और डिप्लोमैट हेनरी किसिंजर का निधन हो गया। जिनका विवादों से बेहद पुराना नाता रहा है। किसिंजर का भारत से भी एक रिश्ता रहा है विवादित बयानों का। भारत को लेकर उनके बयान ने हमेशा दुनिया को अचंभित किया। तो आइए जानते हैं भारत के प्रति उनका क्या नजरिया था।
1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। 1970 में अमेरिकी फॉरेन पॉलिसी में किसिंजर ने एक ऐसा Cut status हासिल किया कि उनका कहा हुआ ब्रह्म की लकीर माना जाने लगा।
1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) की स्थिति बदहाल थी और भारत पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा था। बड़ी संख्या में ढाका से शरणार्थी भारत की सीमा में प्रवेश कर रहे थे। उसी समय भारत विरोधी निक्सन ने अपने एक बयान से न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
जुलाई 1971 में राष्ट्रपति निक्सन के बतौर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर दिल्ली आए। यहां उन्होंने साफ-साफ संकेत दिया कि बांग्लादेश के सवाल पर भारत-पाकिस्तान युद्ध में अगर चीन हस्तक्षेप करता है तो भारत अमेरिका से किसी मदद की उम्मीद नहीं रखे।
दरअसल उस वक्त राष्ट्रपति निक्सन पाकिस्तान की कत्ले आम मचाने वाली हुकूमत याहिया खान का समर्थन कर रहे थे। पाकिस्तान मौजूदा बांग्लादेश में कत्लेआम मचा रहा था। लेकिन इस पर निक्सन किसिंजर की जोड़ी चुप्प थी।
1971 की जंग शुरू होने से पहले इंदिरा जब राष्ट्रपति निक्सन से मिलने गईं तो इस दौरान निक्सन और किसिंजर का उनसे काफी उखड़े नजर आए और इंदिरा गांधी के प्रति उन दोनों का ये रवैया सभी को दिखा।
इंदर मल्होत्रा ने अपनी किताब में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से 1971 में दक्षिण एशिया के संकट पर प्रकाशित 900 पन्नों की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए लिखा है, “कुल मिलाकर किसिंजर का मूल्यांकन यह था कि भारतीय हर तरह से दोगले (B***D) होते हैं, वे वहां युद्ध शुरू कर रहे हैं, उनके लिए पूर्वी पाकिस्तान कोई मुद्दा नहीं रह गया है।”
दरअसल 5 नवंबर 1971 को इंदिरा गांधी ने अमेरिका में किसिंजर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में इंदिरा ने किसिंजर से बेबाक ढंग से कहा था, “भारत पाकिस्तान विरोधी इरादे से कतई संचालित नहीं है, भारत ने पाकिस्तान का विनाश कभी नहीं चाहा, न यह चाहा कि वह स्थायी रूप से पंगु हो जाए।”
हालांकि इस मुलाकात के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति के ओवल दफ्तर में निक्सन और किसिंजर इस बात के लिए खुशी से इतरा रहे थे कि उन्होंने भारतीय पीएम इंदिरा गांधी के साथ बातचीत में अपना उद्देश्य हासिल कर लिया था। अमेरिकी विदेश विभाग से जारी रिकॉर्ड में किसिंजर इंदिरा के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करते हैं और उनके लिए B***h शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इस रिकॉर्ड में निक्सन आगे किसिंजर से सहमति जताते हैं।
हालांकि 2005 में किसिंजर की ये टिप्पणी सार्वजनिक होने के बाद हंगामा मच गया। किसिंजर ने कहा कि उन्हें अपनी टिप्पणी पर खेद है और वह इंदिरा गांधी का सम्मान करते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति से दूसरी मुलाकात में निक्सन ने इंदिरा गांधी को 20 मिनट तक इंतजार करवाया। निक्सन ने कहा कि भारत पाकिस्तान की सीमा से अपनी फौज वापस करने पर विचार करें। आयरन लेडी इंदिरा ने निक्सन के इस ऑफर का कोई जवाब नहीं दिया था। इंदिरा के मौन का अर्थ क्या था इसे दुनिया ने 1971 की जंग में पाकिस्तान की हार और बांग्लादेश के निर्माण के रूप में देखा।
12 दिसंबर 1971 तक बांग्लादेश में पाकिस्तानी फौज के कमांडर सरेंडर को तैयार हो गए। इसी दौरान अमेरिका निक्सन-किसिंजर की जोड़ी ने अपनी आखिरी चाल चली। उन्होंने नौसैनिक बेड़े यूएसएस एंटरप्राइज सहित सातवें बेड़े को बांग्लादेश की ओर भेज दिया। लेकिन सातवां बेड़ा बांग्लादेश के आसपास पहुंचता उससे पहले ही पाकिस्तानी सेना पस्त हो चुकी थी। 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने सरेंडर कर दिया।

