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क्या है हलाल सर्टिफिकेशन? जिस पर यूपी सरकार ने लगाया बैन

नई दिल्ली। यूपी की योगी आदित्यनाथ सराकर ने शनिवार (18 नवंबर) को हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़े खाद्य पदार्थों को बनाने, बेचने और भंडारण पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया। यूपी सरकार ने कहा कि तेल, साबुन, टूथपेस्ट और शहद जैसे शाकाहारी प्रोडक्ट्स के लिए हलाल सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं है।

लखनऊ के ऐशबाग में मोतीझील कॉलोनी के निवासी शैलेंद्र कुमार शर्मा की शिकायत पर शुक्रवार को हजरतगंज थाने में हलाल प्रोडक्ट से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था जिसके बाद यह एक्शन लिया गया है।

हलाल उत्पाद का क्या मतलब है-
हलाल एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है-अनुमति। हलाल सर्टिफाइड का मतलब है कि प्रोडक्ट्स इस्लामी कानून के मुताबिक स्वीकार किया गया है।

हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स से मुस्लिम उपभोक्ताओं को यह भरोसा हो जाता है कि वे जिन उत्पादों का उपयोग कर रहें हैं, वो इस्लामी कानून की आवश्यकता को पूरा करते हैं और इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त हैं। दुनिया भर में लगभग 2 अरब मुसलमान हैं, जिनमें से लगभग 4 मिलियन लोग अमेरिका में रहते हैं। अमेरिका में बड़े पैमाने पर हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स की बिक्री होती है।

कब शुरू हुआ हलाल सर्टिफिकेशन? 
1974 में पहली बार हलाल सर्टिफिकेशन मांस के लिए शुरू किया गया था। इससे पहले हलाल सार्टिफिकेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है। हालांकि, 1993 में हलाल सर्टिफिकेशन सिर्फ मांस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे अन्य उत्पादों पर लागू किया गया।