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रामचरितमानस पर बिहार के मंत्री विवादित बयान, पोटैशियम सायनाइड से की तुलना

नई दिल्ली। बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर विवादित बया दिया है। उन्होंने रामचरितमानस की तुलना पोटैशियम सायनाइड से की है। उन्होंने हिन्दी दिवस पर एक कार्यक्रम के दौरान ये बयान दिया। जब तक यह पोटेशियम साइनाइड रहेगा, तब तक मैं इसका विरोध जारी रखूंगा।

गुरुवार यानी 14 सितंबर को पटना में बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि ‘पचपन तरह का व्यंजन परोस कर उसमें पोटैशियम सायनाइड मिला दीजिए तो क्या होगा, हिंदू धर्म ग्रंथ का हाल भी ऐसा ही है।’

बाबा नागार्जुन और लोहिया ने भी टिप्पणी की है और रामचरितमानस को लेकर मेरी आपत्ति है और जीवन भर रहेगी। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी इस पर टिप्पणी कर चुके हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक गटर में उतरने वालों की जातियां नहीं बदली जाएंगी तब तक इस देश में आरक्षण और जातीय गणना की जरूरत पड़ती रहेगी।

पहले भी रामचरितमानस पर कर चुके हैं विवादित टिप्पणी

ये पहली बार नहीं है जब चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को लेकर ऐसा बयान दिया हो, इससे पहले भी वो रामचरितमानस को समाज को बांटने वाला बता चुके हैं। जनवरी 2023 में नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा थ, “मनुस्मृति में समाज की 85% आबादी वाले बड़े तबके के खिलाफ गालियां दी गईं। रामचरितमानस के उत्तर कांड में लिखा है कि नीच जाति के लोग शिक्षा ग्रहण करने के बाद सांप की तरह जहरीले हो जाते हैं। यह नफरत को बोने वाले ग्रंथ हैं।”

शिक्षा मंत्री ने कहा था कि एक युग में मनुस्मृति, दूसरे युग में रामचरितमानस, तीसरे युग में गुरु गोवलकर का बंच ऑफ थॉट, ये सभी देश को, समाज को नफरत में बांटते हैं। नफरत देश को कभी महान नहीं बनाएगी। देश को महान केवल मोहब्बत ही बनाएगी।