नई दिल्ली। हिंदुस्तान में राजनीति के हजार रंग हैं और मौका जब चुनाव का हो, तो इसका एक-एक रंग ऐसा खिल कर सामने आता है कि, देखने वाले बस देखते रह जाते हैं। ऐसा ही एक रंग दिखा है राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में आने वाली खण्डार विधानसभा सीट पर, जहां वर्तमान विधायक का परिवार ही उसका विरोधी बन गया है।
आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी- ‘बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपइया’ लेकिन खण्डार से विधायक अशोक बैरवा के लिए बाप और भैया… दोनों बन गए हैं टिकट कटइया। विधायक जी के पिता डालचंद बैरवा ने, फीडबैक लेने गए पर्यवेक्षक से कहा है कि, अगर उनके बेटे अशोक को टिकट दिया तो पार्टी की हार निश्चित है।
विधायक के पिता जी ने, यह बात भरे सभागार में कही और इसे सुन वहां मौजूद लोगों ने खूब ताली बजाई। इसके बाद, जब पर्यवेक्षक ने उम्मीदवारी का आवेदन मांगा तो, वर्तमान विधायक के छोटे भाई सुनील तिलकर और उनकी पत्नी ने सबसे पहले आवेदन दिया। यानी विपक्ष से पहले, अशोक को उनके पिता और भाई ने ही ‘शॉक’ दे दिया है।
अशोक बैरवा ने वर्ष 1998 से 2008 तक, हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीन बार खण्डार सीट पर जीत दर्ज की थी। 2013 में वो चुनाव हार गए थे लेकिन 2018 में फिर से विधान सभा पहुंचे। 2018 में खण्डार सहित, पूरे भरतपुर संभाग में भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया था। इसलिए बीजेपी यहां पूरा दम लगाए हुए है।

