नई दिल्ली। मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 4 मई को तीन आदिवासी महिलाओं को निर्वस्त्र परेड कराई गई। महिलाओं के परिजनों की हत्या कर दी गई। 19 जुलाई को इस घटना का 26 सेकेंड का वीडियो सामने आया था। जिसके बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया। सरकार के प्रति लोगों में गुस्सा दिखा। इन महिलाओं में से एक भारतीय सेना के पूर्व जवान की पत्नी थी। जिन्होंने असम रेजिमेंट में सूबेदार के रूप में सेवाएं दी थी। उन्होंने कहा कि मैं कारगिल पर रहा, देश को बचाने के लिए बॉर्डर पर भी तैनात रहा लेकिन अपने गांव, अपने परिवार और अपनी पत्नि को न बचा सका।
सेना के पूर्व जवान ने एक इंटरव्यू में बताया, ‘जब हिंसक भीड़ ने हमारे गांव को जलाना शुरू किया तो हम जंगल में छिप गए। वे लोग जानवरों को भी मार रहे थे, वो भी जान बचाकर जंगल की तरफ भागे। जहां लोग छिपे हुए थे, वहां पर हिंसा करने वाले लोग भी पहुंच गये। एक बाप-बेटे की हत्या कर दी थी और उसकी बेटी और मेरी पत्नी को लेकर गये, उनके कपड़े उतार दिए।’
डर के मारे महिलाओं ने कपड़े उतार दिए, वरना वे लोग उन्हें जान से मार देते। उनकी संख्या बहुत ज्यादा थी। उनके पास हथियार था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा हमला होगा। जिस तरह से इन लोगों ने किया, ऐसा तो कोई जानवर भी नहीं करता होगा।
हिंसा के वक्त वहां मौजूद पुलिस भाग गई थी और उन्हें खुली छूट मिल गई थी। उन्होंने कहा कि मैं वीडियो में दिख रहे कुछ लोगों को पहचान सकता हूं लेकिन जो दूर के हैं, उन्हें पहचानना मुश्किल है।
सेना में सूबेदार रह चुके पीड़ित महिला के पति ने बताया कि मैं श्रीलंका में था, कारगिल में भी अपने देश के लिए सेवा की लेकिन अब रिटायर होने के बाद मैं अपनी पत्नी, अपने घर और अपने गांव की रक्षा नहीं कर पाया। अत्याचार करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्हें सख्त से सख्त सजा मिले।

